
दी ग्लोबल टाईम्स न्यूज़/ देहरादून
देहरादून: रमोला भर चैरिटेबल ट्रस्ट (आरबीसीटी) द्वारा एमजे ग्रैंड इन होटल, देहरादून में “महिलाओं की पूर्ण क्षमता के लिए लैंगिक असमानता और बाधाओं को खत्म करना” विषय पर एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। 1997 में स्थापित आरबीसीटी ने उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के पीड़ितों पर ध्यान केंद्रित करते हुए शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए वैश्विक STOP (बच्चों और महिलाओं की तस्करी और उत्पीड़न को रोकने के लिये) आंदोलन शुरू किया गया था। जिसे लेकर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।
बुधवार को आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल, दून इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रमुख सलाहकार एन. रविशंकर सहित संस्था के पदाधिकारियों ने संयुक्त तौर पर किया।
रमोला भर चैरिटेबल ट्रस्ट संगठन लैंगिक-न्यायपूर्ण समाज बनाने के लिए अधिकार-आधारित, सहयोगी और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाता है।
कार्यशाला का आयोजन आरबीसीटी की संस्थापक और स्टॉप की अध्यक्ष सुश्री रोमा देवव्रत और आरबीसीटी के ट्रस्टी और तकनीकी सलाहकार श्री देवव्रत चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दून इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रमुख सलाहकार श्री एन. रविशंकर ने संस्थागत स्तर पर लैंगिक असमानता पर प्रकाश डाला। आरबीसीटी के सलाहकार श्री अमिताव भट्टाचार्य ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया गया। मुख्य अतिथि, उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि आज सरकार द्वारा मानव तस्करी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे है। वहीं उन्होंने कहा कि मानव तस्करी को रोकने के लिए हम सभी को मिलकर सहयोग करना होगा। साथ ही माता मातापिता को बच्चों की मॉनिटरिंग भी जरूर करनी होगी। उन्होंने बताया कि ucc के अंतर्गत लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण हमारे लिए प्रभावी सिद्ध होगा क्योंकि आयोग में आए दिन इस प्रकार के केस आते हैं जिसमें महिला व पुरुष एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में तो रहते हैं परंतु किसी अनहोनी के होने पर महिला को न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है आज पंजीकरण के माध्यम से कानून की पहुंच उस पुरुष तक आसान हो जाएगी। जिससे कि भविष्य में कभी उसे आवश्यकता पड़े तो न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही लिव इन के मामलों में भी कमी आएगी।
उन्होंने लैंगिक असमानता को दूर करने में चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला, सरकारी निकायों के साथ अनुचित समन्वय के कारण संकट में महिलाओं से निपटने में कठिनाइयों का उल्लेख किया।
कार्यशाला में उत्तराखंड के 13 जिलों के लगभग 22 गैर सरकारी संगठनों ने भाग लिया, जिन्होंने लैंगिक असमानता के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को बढ़ावा दिया।