देहरादून (उत्तराखंड) [भारत], 26 सितंबर :सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की दिल्ली बेंच के जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा ने उत्तराखंड कैडर के IFS ऑफिसर संजीव चतुर्वेदी की उस पिटीशन पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है, जिसमें IFS ऑफिसर्स के अप्रेजल रिपोर्ट चैनल से जुड़े उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के ऑर्डर को चुनौती दी गई थी।
21 सितंबर को पास किए गए रिक्यूज़ल ऑर्डर में कहा गया, “कुछ समय तक मामले की सुनवाई के बाद, माननीय श्री राजवीर सिंह वर्मा, मेंबर (J), इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हैं।” ऑर्डर में रिक्यूज़ल का कोई खास कारण नहीं बताया गया।
चतुर्वेदी द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, इसके साथ ही चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से खुद को अलग करने वाले जजों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।अब तक सुप्रीम कोर्ट के दो जज, नैनीताल हाई कोर्ट के चार जज, CAT के चेयरमैन समेत नौ जज और डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी के दो जज चतुर्वेदी से जुड़े मामलों से खुद को अलग कर चुके हैं।
इससे पहले सितंबर-अक्टूबर 2025 में, नैनीताल हाई कोर्ट के जज जस्टिस आलोक वर्मा और जस्टिस रवींद्र मैथानी ने चतुर्वेदी द्वारा CAT सदस्यों और रजिस्ट्री के खिलाफ हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर का कथित तौर पर पालन न करने पर दायर कंटेम्प्ट केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
फरवरी 2024 में, नैनीताल हाई कोर्ट के जस्टिस मनोज तिवारी ने चतुर्वेदी के सेंट्रल डेप्युटेशन के बारे में कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमिटी (ACC) से डॉक्यूमेंट्स मंगाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
मई 2023 में, नैनीताल हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश थपलियाल ने भी AIIMS, नई दिल्ली के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) के तौर पर चतुर्वेदी के एंटी-करप्शन इन्वेस्टिगेशन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स मंगाने से जुड़े मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
इससे पहले, फरवरी 2025 में, जस्टिस हरविंदर ओबराय और बी आनंद वाली CAT डिवीजन बेंच ने बिना कोई कारण बताए चतुर्वेदी की अप्रेजल रिपोर्ट को डाउनग्रेड करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
अप्रैल 2025 में, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) नेहा कुशवाहा ने CAT जज मनीष गर्ग के खिलाफ चतुर्वेदी द्वारा फाइल किए गए मानहानि केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, और दूसरे CAT जज के साथ पिछले फैमिली रिलेशन का हवाला दिया।
चतुर्वेदी पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आए मामलों में सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। नवंबर 2013 में, सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस रंजन गोगोई ने चतुर्वेदी की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था जिसमें हरियाणा में कथित भ्रष्टाचार के मामलों की CBI जांच की मांग की गई थी। अगस्त 2016 में, सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस यू. यू. ललित ने भी इस मामले से खुद को अलग कर लिया था।
दूसरे मामलों में मार्च 2019 में CAT चेयरमैन जस्टिस एल नरसिम्हन रेड्डी का, फरवरी 2021 में CAT जज जस्टिस आर एन सिंह का, और नवंबर 2023 में CAT जज जस्टिस मनीष गर्ग और चचबिलेंद्र राउल का चतुर्वेदी से जुड़े मामलों से खुद को अलग करना शामिल है।
जनवरी 2025 में, CAT जज जस्टिस राजीव जोशी ने भी लोकपाल से जुड़े चतुर्वेदी के सेंट्रल डेप्युटेशन केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
