दी ग्लोबल टाइम्स न्यूज
ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए रूस के साथ समझौते पर बल देने वाले बयान दिए हैं और यूक्रेन को अमेरिकी सैनिक सहायता बंद करने की धमकी भी दी है।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन नेटो के प्रमुख मार्क रटे के सामने अपने संगठन की सार्थकता बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। इसी सिलसिले में मार्क रटे ने मार्च में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाक़ात की. उनका मक़सद अमेरिका को नेटो के केंद्र में बरकरार रखना था।
जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से न्यूयॉर्क में पिछले साल सितंबर में मुलाक़ात की थी, तब वो अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार थे.
उस वक्त उन्होंने कहा था, “यदि हम जीत गए, तो मुझे लगता है कि हम इस मामले को बहुत जल्दी सुलझा लेंगे.” अब उनके कहने का मतलब कितनी जल्दी से था, यह तो समय के साथ बदलता चला गया। इसके बाद एक टीवी डिबेट में ट्रंप ने वादा किया था, “मैं राष्ट्रपति बनने से पहले इस मामले को सुलझा लूंगा.” यह बयान ट्रंप के उस दावे के आगे की बात थी, जो उन्होंने मई 2023 में किया था. तब ट्रंप ने कहा था कि राष्ट्रपति बनने के 24 घंटे के भीतर वो युद्ध को रुकवा देंगे।
परंतु इस बयान के बाद और इस सब के चलते यूरोपीय देश अब यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि अमेरिकी सहायता के बिना वो ख़ुद इस समस्या से कैसे निपट सकते हैं?